Saturday, June 8, 2019

बरमूडा ट्राएंगल का ऐसा रहस्य जिसके आगे फेल हो गई वैज्ञानिकों की सारी थ्योरी



बरमूडा ट्राएंगल, नार्थ अटलांटिक महासागर का वह हिस्सा  जिसे ‘डेविल्सख ट्राएंगल’ यान ‘शैतानी त्रिभुज’ भी कहा जाता है। आज दुनिया विज्ञान के क्षेत्र में कई मील आगे आ गई है लेकिन फिर भी दुनिया के इस हिस्सेह में जो रहस्ये है उसकी वजहों का पता किसी को नहीं लग सका है। भूले से भी अगर कोई जहाज इस जगह पर चला जाये तो नहीं पता चलता उसे कोई आसमान निगल गया या समुद्र।
वैज्ञानिक भी बरमूडा ट्राएंगल के इस रहस्य का पता नहीं लगा पाएं हैं कि आखिर यहां कौन सी शक्ति है जो जहाज को लील जाती है। यह किसी को भी पता नहीं लग सका। अमेरिकी नेवी का मानना है कि यह ट्राएंगल है ही नहीं है और अमेरिकी जियोग्राफिक नामों में ऐसा कोई भी नाम है ही नहीं।
रहस्यमयी बरमूडा ट्रायंगल को शैतान के त्रिकोण के नाम से भी जाना जाता है। समुद्र के इस इलाके में आने से नाविक खौफ खाते हैं। कारण है कि यहां से बीते 50 वर्षों से 3 हजार से ज्यादा पानी के जहाज और 50 से हवाई जहाज गायब हुए हैं। उन जहाजों का आज तक पता नहीं चल पाया है। जहाज इस इलाके में आते हैं और शैतान के त्रिकोण में घुसते ही हवा में गायब हो जाते हैं।
कई ऐसे डॉक्यू मेंट्स हैं जिनमें कहा गया है कि इस जगह पर कई हादसे हुए हैं जो डराने वाले हैं और रहस्ये से भरपूर हैं। दुनिया की कई संस्था एं ऐसी जगह के होने से इंकार कर देती हैं लेकिन कई लेखकों ने समय-समय पर इसका जिक्र किया है।
कहाँ है ये बरमूडा ट्राएंगल
बरमूडा ट्रैंगल का यह क्षेत्र 7 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह क्षेत्र भूमध्य रेखा के नजदीक है, और अमेरिका के फ्लोरिडा तय के पास है। बरमूडा ट्राएंगल अमेरिका के फ्लोरिडा, प्यूर्टोरिको और बरमूडा तीनों को जोड़ने वाला एक ट्रायंगल यानी त्रिकोण है, जहां पहुंचते ही बड़े से बड़ा समुद्री और हवाई जहाज गायब हो जाता है। इस ट्राएंगल के पास पहुंरचते ही न तो जहाज मिलता है और न ही उसके यात्री।
कब-कब लापता हुए जहाज
मैरी सेलेस्टी नाम का एक व्यापारिक जहाज बरमूडा ट्राएंगल क्षेत्र में लापता हो गया था। 4 दिसम्बर 1872 को अटलांटिक महासागर में यह पाया गया। इस जहाज पर सवार यात्री और जहाज के कर्मचारी का कोई पता नहीं चला।
शुरू में यह माना गया कि जहाज समुद्री डाकुओं द्वारा लूट लिया गया होगा। लेकिन जहाज पर कीमती सामानों के सुरक्षित होने से डाकुओं द्वारा जहाज को लूट लिए जाने की बात साबित नहीं हो सकी।
खो गया एक शहर
ऐसा कहा जाता है कि अगर इस जगह पर एयरक्राफ्ट्स और जहाज गायब हो जाते हैं तो इसकी वजह से एलियंस और यूएफओ की सक्रियता। कहा तो यहां तक जाता है कि कई प्राकृतिक, भौगोलिक और दूसरी वजहों के साथ ही इस ट्राएंगल की वजह से अटलांटिस शहर गायब हुआ है।
रहस्य है इस जहाज का गायब हो जाना
अमेरिका के लेफ्टिनेंट कमांडर जी डब्ल्यू वर्ली 309 क्रू सदस्यों के साथ यूएसएस साइक्लोप्स नाम के जहाज से सफर कर रहे थे। बरमूडा ट्राएंगल को पार करते समय यह जहाज कहां खो गया कुछ पता नहीं चला। जिस दिन यह घटना हुई थी, उस दिन मौसम भी अनुकूल था।
क्रू के सदस्य संदेश भेज रहे थे कि सब कुछ ठीक चल रहा है। लेकिन अचानक मंजर बदल गया और जहाज किस दुनिया में खो गया, कोई जान नहीं पाया। अमेरिका के इतिहास में इस जहाज का लापता होना और क्रू मेंबर का गायब होना एक बड़ा रहस्य बना हुआ है।
अमेरिकी सरकार रहती है खामोश
बरमूडा ट्राएंगल के अंदर अमेरिकी सरकार की ओर से एयूटीईसी या अटलांटिक अंडरसी टेस्टे एंड इवैल्यू एशन सेंटर मौजूद है। यह सेंटर एंड्रॉस आईलैंड ऑफ बाहमास पर स्थित है। यहां पर अमेरिकी नेवी उनकी सबमरीन, सोनर और दूसरे हथियारों का टेस्टफ करती है।
हालांकि कई लोग मानते हैं कि यह सिर्फ एक टेस्टिंग सेंटर से ज्यारदा है। लेकिन अमेरका हमेशा से इसपर अपनी चुप्पी साधे हुए है।
पायलट ने बताया है अनुभव
कई लोगों ने यहां पर इलेक्ट्रॉ निक फॉग होने की बात भी कही है। इसे टाइम ट्रैवल टनल भी कहा जाता है। पायलट ब्रूस ग्रेनॉन की मानें तो फ्लाइंग के सिर्फ 28 मिनट के अंदर ही वह इस टनल के अंदर गायब हो गए थे। उनका प्लेकन रडार से गायब हो चुका था। मियाबी बीच पर पहुंचने के बाद ही प्ले न रडार पर वापस नजर आ सका।
हमेशा गलत प्रतीत होती है दिशा बरमूडा ट्राएंगल दुनिया की वह अजब गजब जगह है जहां पर कम्पा स मैग्नेहटिक नॉर्थ की ओर कोई इशारा नहीं करता है। इस वजह से कंफ्यूजन होता है और जिसकी वजह से एयरक्राफ्ट्स और जहाज गायब हो जाते हैं।
वैज्ञानिकों ने किया इसकी मिस्ट्री के खुलासे का दावा
साइंटिस्ट्स ने बरमूडा ट्राएंगल के आसपास के मौसम की काफी बारीकी से स्टडी की। इससे उन्हें ऐसी कई बातें पता चली, जिनके आधार पर वो इसकी मिस्ट्री सुलझाने का दावा कर रहे हैं। हजार सालों से ज्यादा हुए, अब तक कोई भी इस जगह से जिंदा लौट कर नहीं आ पाया।
साइंटिस्ट्स की रिसर्च के मुताबिक, इस ट्राएंगल के ऊपर खतरनाक हवाएं चलती हैं। इन हवाओं की गति 170 मील प्रति घंटे रहती है। जब कोई जहाज इस हवा की चपेट में आता है, तो अपना संतुलन खो बैठता है। जिसके कारण उनका एक्सीडेंट हो जाता है। ये हवाएं इसके ऊपर बनने वाले बादलों के कारण चलती हैं।
इस ट्राएंगल के ऊपर बादल छाए रहते हैं। इन बादलों को जानलेवा इसलिए हो जाते है क्यूंकि ये काफी घने होते हैं। इनके अंदर कई तूफान भी उठते हैं। जैसे ही इन बादलों के अंदर प्लेन जाता है, बैलेंस खो देता है, जिसकी वजह से ज्यादातर प्लेन्स में विस्फोट हो जाता है।
वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि इन बादलों की दिशा का अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है क्योकि ये तेज हवाओं के साथ किस दिशा की ओर जाए पता नहीं चल पाता है। ऐसे में इनसे गुजरते हुए प्लेन को बैलेंस रख पाना वाकई चुनौती भरा काम है।

No comments:

Post a Comment