गंगा का नाम लेने, सुनने, देखने, उसका जल ग्रहण करने, छूने और उसमें स्नान करने से मनुष्य के जन्मों के पाप समाप्त हो जाते हैं।
गंगा दशहरा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को हस्त नक्षत्र में हिमालय से गंगा का आगमन हुआ था। यह तिथि इसीलिए गंगा दशहरा या गंगा दशमी के नाम से प्रसिद्ध है। इस दिन गंगा स्नान की बहुत महत्ता मानी जाती है। गंगा का नाम लेने, सुनने, देखने, उसका जल ग्रहण करने, छूने और उसमें स्नान करने से मनुष्य के जन्मों के पाप समाप्त हो जाते हैं। गंगा दशहरा को पापों का नाश करने वाला कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन आप जिस भी चीज का दान करें उसकी संख्या 10 होनी चाहिए। पितृदोष से पीडि़त लोगों को गंगा दशहरा के दिन पितरों की मुक्ति हेतु गुड़, घी और तिल के साथ मधुयुक्त खीर गंगा में डालनी चाहिए।
शुभ मुहूर्त गंगा दशहरा स्नान का
गंगा दशहरा पर प्रातः 5.45 से शाम 6.27 तक दशमय तिथि होगी इस समय पूजा और दान दोनों ही बेहद शुभ होगा। जबकि स्नान के लिए प्रात: काल 4.15 से 5.25 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त है जिसमें स्नान करना ज्यादा शुभ होगा। साथ ही सूर्य अस्त तक भी श्रद्धालु स्नान कर पुण्य लाभ कमा सकते हैं।
पूजन विधि
अगर घर के करीब गंगा नहीं हैं तो किसी भी नदी या तालाब में स्नान करें या घर में ही स्नान कर गंगा जी का ध्यान करें।
– स्नान के दौरान नदी में 10 बार गोते लगाएं।
– 5 पुष्पांजलि अर्पित करें और गंगा स्नान का मंत्र उच्चारण कर पूजन करें।
– गंगा दशहरा 10 पापों का नाश करने वाला होता है इसलिए पूजा में 10 प्रकार के फूल, दशांग धूप, दीपक, नैवेद्य, तांबूल एवं फल का प्रयोग करें।
– 10 ब्राह्मणों को 16 मुट्ठी जौ और तिल और सत्तू का दान करें।
जप:
गंगा दशहरा पर स्नान के वक़्त ‘ऊँ नम: शिवाय नारायण्यै दशहराय मंत्र का जप करना चाहिए। इसके बाद ‘ ऊँ नमो भगवते एं ह्रीं श्रीं हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे मां पावय स्वाहा मंत्र का भी जप करें।

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