ISRO की मौजूदा समय सारणी के मुताबिक स्पेसक्राफ्ट 19 जून को बेंगलुरु से निकलेगा और 20 या 21 जून तक श्रीहरिकोटा के लॉन्चपैड पर पहुंचेगा। तमिलनाडु के महेंद्रगिरी और बेंगलुरु के ब्यालालू में फाइनल टेस्ट चल रहा है। 9 जुलाई से लॉन्चिंग शुरू करने की तैयारी है। इसरो की इस अभूतपूर्व सफलता को कुछ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। कॉम्युनिकेशन में देरी एक बड़ी समस्या है। कोई भी संदेश भेजने पर उसके पहुंचने में कुछ मिनट का वक़्त तो लगेगा ही।
थ्री डी मैपिंग से लेकर वॉटर मॉलिक्यूल्स तक और मिनरल्स की चेकिंग से उस जगह पर लैंडिंग तक जहां आज तक कोई नहीं पहुंचा है। इसरो ने चांद पर जाने की पूरी तैयारी कर रखी है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने कहा कि जुलाई में भेजे जाने वाले भारत के दूसरे चंद्रयान (चंद्रयान-2) में 13 पेलोड होंगे और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का भी एक पैसिव एक्सपेरिमेंट उपकरण होगा।
हालांकि, इसरो ने नासा के इस उपकरण के उद्देश्य को स्पष्ट नहीं किया है. इस अंतरिक्ष यान का वजन 3.8 टन है. यान में तीन मोड्यूल (विशिष्ट हिस्से) ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) हैं।

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