जल संकट पर नीति आयोग की अलार्म वाली रिपोर्ट
भूमिगत जल को निकालने के लिए हम जिस तरह सबमर्सिबल पंप का इस्तमाल कर रहे हैं| उससे हमाराआज तो निकल रहा है मगर कल नहीं निकल पाएगा लगातार घट रहे भूमिगत जल के मुख्य कारणों में एक महत्वपूर्ण कारक है सबमर्सिबल पंप| इस पंप के कारण ज़मीन के नीचे का पानी लगातार घटता जा रहा है|
ऐसे में आपने दक्षिण भारत के महानगर चेन्नई के बारे में तो सुना ही होगा जहां भूमिगत जल लगभग समाप्त हो चुका है| वहां अब लोग पानी के लिए घंटो भर लाईन लगाकर खड़े रहते है और पानी से जुड़ी अपनी छोटी-छोटी जरुरतों को पूरा करने के लिए भी उन्हें अब टैंकर के पानी पर निर्भर रहना पडता है पानी की समस्या का सामना कर रही चेन्नई की बड़ी -बड़ी आईटी कंपनियां और होटलें तो बंद होने के कगार पर हैं|
इसी बीच नीति आयोग ने देश में बढ़ रहे जल सकंट पर एक चौंका देने वाला रिपोर्ट पेश किया है|
नीति आयोग के मुताबिक 2020 तक देश के 21 शहरों का भूमिगत जल समाप्त हो जाएगा…साथ ही नीति आयोग ने उन 21 शहरों के नाम भी जारी किए जो निम्न है-
नई दिल्ली, गुरुग्राम, अमृतसर, जालंधर, पटियाला, मोहाली, लुधियाना, यमुना नगर, गाज़ियाबाद, आगरा, जयपुर, रतलाम, इंदौर, गाँधीनगर, अजमेर, जोधपुर, बिकानेर, हैदराबाद, वेल्लोर, बेंगलुरु और चेन्नई|
जल संकट का दूसरा बड़ा कारण मानसून को भी कहा जा सकता है…देश के बड़े शहरों में से एक चेन्नई में Water Crisis पानी आपूर्ति करने वाले चार जलाशय लगभग सूख चुके हैं|
आपको बता दें की मानसून देश के केवल कुछ ही हिस्सों में पहुँचा है, जहाँ यह पहुँचा भी है उनमें से अधिकतर जगहों पर देरी हुई है और औसत से काफ़ी कम बारिश हुई है, अधिकतर जलाशय सूख चुके हैं|Read more

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